महाभारत केवल युद्धकथा नहीं है। यह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - चारों पुरुषार्थों का विश्वकोश है। महर्षि वेदव्यास ने इसे 'जय' नाम से 8800 श्लोकों में शुरू किया, फिर 'भारत' नाम से 24000 श्लोक हुए, और अंततः उपकथाओं सहित 'महाभारत' बना जिसमें एक लाख से अधिक श्लोक हैं।
परंपरा कहती है कि गणेश जी ने इसे लिपिबद्ध किया। शर्त थी कि वेदव्यास बिना रुके बोलेंगे और गणेश जी समझकर लिखेंगे। जब गणेश की कलम टूट गई तो उन्होंने अपना एक दांत तोड़कर लिखना जारी रखा। इसलिए गणेश जी एकदंत कहलाते हैं।