Open Knowledge Platform

🕉️ मन्वन्तर आदि काल विभाग ⏳

📖 श्रीमद्भागवत स्कन्ध 3 अध्याय 11 के आधार पर

🔬 1. सूक्ष्म काल-मान

🔹 जिसका और विभाग न हो सके (अविभाज्य सूक्ष्मतम कण) परमाणु है।
💠 कार्यवर्ग का सबसे छोटा अंश, जो अभी किसी वस्तु के रूप में नहीं आया और किसी अन्य परमाणु से जुड़ा भी नहीं है।
⚛️ 2 परमाणु = 1 अणु
✨ 3 अणु = 1 त्रसरेणु
🌞 झरोखे से होकर आयी हुई सूर्य की किरणों के प्रकाश में आकाश में उड़ता देखा जाता है, उसे त्रसरेणु कहते हैं।
⏱️ 3 त्रसरेणु पार = 1 त्रुटि
☀️ तीन त्रसरेणुओं को लाँघने में सूर्य की किरण को जितना समय लगता है, उसे 1 त्रुटि कहते हैं। यही काल की सबसे सूक्ष्म माप है।
🔸 100 त्रुटि = 1 वेध
🔸 3 वेध = 1 लव
👁️ 3 लव = 1 निमेष
😊 पलक झपकने में जितना समय लगता है, उसे निमेष कहते हैं।
⏳ 3 निमेष = 1 क्षण
⌛ 5 क्षण = 1 काष्ठा
🕐 15 काष्ठा = 1 लघु
⏰ 15 लघु = 1 नाडिका (दण्ड)
🌙 2 नाडिका = 1 मुहूर्त (48 मिनट)

🌅 2. व्यावहारिक काल-मान

🌗 6 या 7 नाडिका = 1 प्रहर (याम)
📅 दिन के घटने-बढ़ने के अनुसार (दिन एवं रात्रि की दोनों सन्धियों के दो मुहूर्तों को छोड़कर) छः या सात नाडिका का एक 'प्रहर' होता है।
🪔 नाडिका मापने की विधि
🥣 छः पल तांबे का एक ऐसा बर्तन बनाया जाए जिसमें एक प्रस्थ जल आ सके और चार माशे सोने की चार अंगुल लंबी सलाई बनवाकर उसके द्वारा उस बर्तन के पेंदे में छेद करके उसे जल में छोड़ दिया जाए। जितने समय में एक प्रस्थ जल उस बर्तन में भर जाए और बर्तन डूब जाए, उतने समय को एक 'नाडिका' कहते हैं।
⚖️ 1 पल (वजन) = 4 तोला = लगभग 46 ग्राम
⚖️ 6 पल = 24 तोला = लगभग 276 ग्राम ताँबा
💧 1 प्रस्थ = लगभग 640 ml
💍 4 माशे = 4 ग्राम सोना
📏 4 अंगुल = लगभग 3 इंच
☀️ 4 प्रहर = 1 दिन (या 1 रात)
🌞🌜 8 प्रहर (4 दिन + 4 रात) = मनुष्य का 1 अहोरात्र (दिन-रात)
🌒 15 अहोरात्र = 1 पक्ष (शुक्ल या कृष्ण)
🌙 पक्ष शुक्ल और कृष्ण भेद से दो प्रकार का माना गया है।
🗓️ 2 पक्ष = 1 मास (महीना)
👨‍👩‍👧‍👦 मनुष्यों का 1 मास, पितरों का 1 अहोरात्र होता है।
🌿 2 मास = 1 ऋतु
🔄 6 मास = 1 अयन (दक्षिणायन / उत्तरायण)
🧭 अयन दक्षिणायन और उत्तरायण भेद से दो प्रकार के होते हैं।
📆 2 अयन = 1 वर्ष (12 मास)
🌟 दो अयन मिलकर देवताओं का एक अहोरात्र होता है।

🪐 3. दिव्य काल-मान

🔱 युग ⏳ अवधि
🕊️ सत्ययुग 17,28,000 वर्ष
🏹 त्रेतायुग 12,96,000 वर्ष
🪈 द्वापरयुग 8,64,000 वर्ष
🌑 कलियुग 4,32,000 वर्ष
✨ कुल 1 चतुर्युगी 43,20,000 वर्ष
📜 71 चतुर्युगी = 1 मन्वन्तर = 30,67,20,000 वर्ष
🌌 14 मन्वन्तर = 1 कल्प = ब्रह्मा जी का 1 दिन = 432 करोड़ वर्ष
❓ सवाल: 30,67,20,000 × 14 = 4,29,40,80,000 ही होता है, फिर 432 करोड़ कैसे?

🧮 1 मन्वन्तर = 71 चतुर्युगी = 30,67,20,000 वर्ष
🧮 14 मन्वन्तर = 71 × 14 = 994 चतुर्युगी = 4,29,40,80,000 वर्ष

⏳ बाकी 6 चतुर्युगी (1000 - 994 = 6) = 15 संध्याओं का समय
🌅 15 संध्या = 15 × 17,28,000 = 2,59,20,000 वर्ष

✅ 4,29,40,80,000 + 2,59,20,000 = 4,32,00,00,000 = 432 करोड़ वर्ष = 1000 चतुर्युगी = 1 कल्प
🙏 ब्रह्मा जी की आयु = 100 वर्ष = 2 परार्ध
🧭 अभी पहला परार्ध बीत चुका है, दूसरा चल रहा है।
🧭 पहले परार्ध में पहला कल्प = ब्राह्म कल्प (पहला महान कल्प, इसी में ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई थी।)
पहले परार्ध का अंतिम कल्प = पाद्म कल्प
दूसरे परार्ध का आरम्भक (पहला कल्प) = वाराह कल्प (वर्तमान)
💫 2 परार्द्ध = श्री हरि का 1 निमेष
यह परमाणु से लेकर द्विपरार्ध पर्यन्त फैला हुआ काल सर्वसमर्थ होनेपर भी सर्वात्मा श्रीहरि पर किसी प्रकार की प्रभुता नहीं रखता।

📅 4. वर्तमान काल (वर्ष तक)

परार्ध = द्वितीय परार्ध
ब्रह्मा जी की आयु का दूसरा भाग चल रहा है।
🌌 ब्रह्मा जी का दिन = वाराह कल्प (श्वेत वाराह कल्प)
ठीक इस कल्प से पहले पाद्म कल्प हुआ था।
👑 मन्वन्तर = वैवस्वत मन्वन्तर (7 वाँ मन्वन्तर)
6 मन्वन्तर बीत चुके हैं।
🔄 चतुर्युगी = 28 वीं चतुर्युगी चल रही है
27 चतुर्युगी बीत चुके हैं और 28 वीं चतुर्युगी के तीन युग क्रमशः बीत चुके हैं:
🕊️ सत्ययुग = बीत चुका
🏹 त्रेतायुग = बीत चुका
🪈 द्वापरयुग = बीत चुका
🔄 युग = कलियुग
28 वी चतुर्युगी का कलयुग चल रहा है।
कलियुग के 5,127 वर्ष बीत चुके हैं और 5128 वा वर्ष वर्तमान में चल रहा है। (इसकी शुरुआत 19 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हुई है)।
🌑 कलियुग का वर्तमान वर्ष 📊
📜 विवरण 📅 वर्ष
🕰️ कलियुग प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व
⏳ आज तक बीता (2026 तक) ~ 5,127 वर्ष
📈 कुल कलियुग 4,32,000 वर्ष
⏰ शेष बाकी ~ 4,26,872 वर्ष
💡 ऊपर के काल-मान से समझें: कलियुग के 5,128 वर्ष = लगभग 1.19 चतुर्युगी का 0.11% ही बीता है। अभी बहुत समय बाकी है।
📆 विक्रम संवत् के अनुसार
🔸 वर्तमान विक्रम संवत् - 2083
🔸 शक संवत् - 1948
🔸 कलियुगाब्द - 5128

Source: Traditional Hindu scriptures such as Vedas, Upanishads, Puranas and other publicly available spiritual literature.
This content is intended for general educational purposes only. Interpretations of religious texts may differ based on tradition, philosophy and personal belief. GSR Universe does not claim absolute authority over any religious interpretation and does not provide spiritual or professional advice.