अठारह महापुराण स्मृति सूत्र
भारतीय परंपरा में अठारह महापुराणों को याद रखने के लिए यह प्रसिद्ध स्मृति सूत्र प्रयोग किया जाता है।
मूल श्लोक
अनापलिङ्गकूस्कानि पुराणानि प्रचक्षते ॥
सूत्र का विश्लेषण
मद्वयम्
मत्स्य पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण
भद्वयम्
भागवत पुराण एवं भविष्य पुराण
ब्रत्रयम्
ब्रह्म पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण तथा ब्रह्माण्ड पुराण
वचतुष्टयम्
विष्णु पुराण, वायु पुराण, वामन पुराण एवं वराह पुराण
अ
अग्नि पुराण
ना
नारद पुराण
प
पद्म पुराण
लिङ्ग
लिङ्ग पुराण
कू
कूर्म पुराण
स्क
स्कन्द पुराण
अठारह महापुराण
विभिन्न पुराणों एवं परंपराओं में महापुराणों की सूची का क्रम कुछ भिन्न मिल सकता है, किन्तु उपर्युक्त सूची अठारह महापुराणों के सर्वाधिक प्रचलित क्रम को दर्शाती है।
इस सूत्र का महत्व
प्राचीन भारत में शिक्षा का प्रमुख माध्यम श्रुति और स्मृति पर आधारित था। लंबी सूचियों को याद रखने के लिए विद्वानों ने ऐसे सूत्रों का निर्माण किया। यह श्लोक उसी परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
आज भी संस्कृत, पुराण और भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह सूत्र अत्यंत उपयोगी माना जाता है।