कोई कर कानून के प्राधिकार के बिना न तो लगाया जाएगा और न ही संग्रहित किया जाएगा।
सिद्धांत: No Taxation Without Legislation
Finance, Property, Contracts and Suits
अनुच्छेद 264 से 300A | Articles 264 to 300A
संविधान के भाग 12 में वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वादों का वर्णन है (अनुच्छेद 264-300A)। यह 4 अध्यायों में विभाजित है। इसमें संचित निधि, आकस्मिकता निधि, संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 300A), सरकारी अनुबंध और वाद दायर करने के प्रावधान शामिल हैं।
Finance
अनुच्छेद 264-291
Borrowing
अनुच्छेद 292-293
Property, Contracts
अनुच्छेद 294-300
Right to Property
अनुच्छेद 300A
कोई कर कानून के प्राधिकार के बिना न तो लगाया जाएगा और न ही संग्रहित किया जाएगा।
सिद्धांत: No Taxation Without Legislation
संचित निधि: सभी राजस्व, ऋण, अग्रिम जमा। संसद की स्वीकृति से निकासी।
लोक लेखा: अन्य सार्वजनिक धन। कार्यपालिका द्वारा संचालित।
भारत की आकस्मिकता निधि: राष्ट्रपति के अधीन। अप्रत्याशित व्यय के लिए।
राज्य की आकस्मिकता निधि: राज्यपाल के अधीन।
संसद/विधानमंडल की पूर्व स्वीकृति के बिना अग्रिम दिया जा सकता है।
गठन: राष्ट्रपति हर 5 साल में वित्त आयोग नियुक्त करता है।
कार्य:
वर्तमान: 16वां वित्त आयोग (2026-2031)
अनुच्छेद 292: भारत सरकार संसद द्वारा निर्धारित सीमा तक उधार ले सकती है।
अनुच्छेद 293: राज्य सरकार विधानमंडल द्वारा निर्धारित सीमा तक उधार ले सकती है। केंद्र की सहमति आवश्यक यदि बकाया है।
किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से कानून के प्राधिकार के बिना वंचित नहीं किया जाएगा।
महत्व: 44वां संशोधन 1978 द्वारा मौलिक अधिकार से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया गया।
प्रभाव: सरकार कानून बनाकर संपत्ति अधिग्रहण कर सकती है, मुआवजा आवश्यक।
Consolidated Fund of India
अनुच्छेद 266(1)
Contingency Fund of India
अनुच्छेद 267(1)
Public Account of India
अनुच्छेद 266(2)
अनुच्छेद 280। हर 5 साल। केंद्र-राज्य कर बंटवारा। 16वां वित्त आयोग 2026-31।
अनुच्छेद 148। संघ और राज्यों के लेखों का परीक्षण। संसद को रिपोर्ट।
अनुच्छेद 300A। कानूनी अधिकार। 44वां संशोधन 1978। मौलिक अधिकार से हटाया गया।
अनुच्छेद 263। 1990 में स्थापित। राज्यों के बीच समन्वय। विवाद समाधान।
Source: Government of India Acts, Official Gazettes and Public Legal Documents.
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