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📜 भाग 19

प्रकीर्ण

Miscellaneous

अनुच्छेद 361 से 367 | Articles 361 to 367

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भाग 19 क्या है?

संविधान के भाग 19 में विविध विषयों के प्रावधान हैं (अनुच्छेद 361-367)। इसमें राष्ट्रपति/राज्यपाल को न्यायालय से संरक्षण, न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन, अंतर्राष्ट्रीय समझौते, और संविधान का निर्वचन शामिल है। यह भाग विविध महत्वपूर्ण प्रावधानों का संग्रह है।

📖 महत्वपूर्ण अनुच्छेद

Key Articles

अनुच्छेद 361

राष्ट्रपति और राज्यपालों का संरक्षण

361(1): राष्ट्रपति या राज्यपाल अपने पद की शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के पालन के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा।

361(2): राष्ट्रपति/राज्यपाल के विरुद्ध उनके पद पर रहते हुए कोई दांडिक कार्यवाही नहीं चलाई जाएगी, न ही गिरफ्तारी का वारंट जारी होगा।

361(3): सिविल कार्यवाही के लिए 2 माह का नोटिस आवश्यक। केवल व्यक्तिगत हैसियत में किए गए कार्यों के लिए।

361(4): पद छोड़ने के बाद भी पदकाल के कार्यों के लिए कोई कार्यवाही नहीं।

🛡️ महत्व: राष्ट्रपति/राज्यपाल को पद के कार्यों में स्वतंत्रता। महाभियोग ही एकमात्र उपाय।
अनुच्छेद 361A

संसद और विधानमंडल की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण

संसद या राज्य विधानमंडल की कार्यवाहियों के सत्यनिष्ठ प्रतिवेदन के प्रकाशन के लिए कोई व्यक्ति न्यायालय में दायी नहीं होगा।

शर्त: प्रकाशन सद्भावनापूर्वक और सार्वजनिक हित में हो।

जोड़ा गया: 44वां संशोधन 1978

📰 उद्देश्य: प्रेस की स्वतंत्रता। संसदीय कार्यवाहियों की पारदर्शिता।
अनुच्छेद 362

देशी राज्यों के शासकों के अधिकार [निरसित]

निरसित: 26वां संशोधन 1971 द्वारा निरसित।

पूर्व प्रावधान: देशी राज्यों के शासकों के निजी अधिकारों, विशेषाधिकारों और भत्तों की गारंटी।

कारण: Privy Purse समाप्त। राजाओं के विशेषाधिकार खत्म।
अनुच्छेद 363

कुछ संधियों, करारों से उत्पन्न विवादों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन

देशी राज्यों के शासकों के साथ भारत सरकार द्वारा की गई संधियों, करारों, सनदों से उत्पन्न विवादों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

क्षेत्र: विलय, एकीकरण, संधियों से संबंधित विवाद।

अनुच्छेद 363A

देशी राज्यों के शासकों की मान्यता समाप्ति

363A: 26वां संशोधन 1971 द्वारा जोड़ा गया।

देशी राज्यों के शासकों की मान्यता समाप्त। Privy Purse समाप्त।

प्रभाव: सभी विशेषाधिकार, भत्ते, व्यक्तिगत अधिकार समाप्त।

अनुच्छेद 364

महापत्तनों और विमानपत्तनों के बारे में विशेष उपबंध

राष्ट्रपति लोक अधिसूचना द्वारा घोषणा कर सकता है कि कोई कानून महापत्तन या विमानपत्तन पर लागू नहीं होगा या संशोधनों के साथ लागू होगा।

उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और परिवहन की सुविधा।

अनुच्छेद 365

संघ द्वारा दिए गए निदेशों का अनुपालन करने में विफलता का प्रभाव

यदि कोई राज्य संघ द्वारा अनुच्छेद 256, 257 के अधीन दिए गए निदेशों का पालन करने में विफल रहता है, तो राष्ट्रपति यह मान सकता है कि राज्य सरकार संविधान के अनुसार नहीं चल सकती।

परिणाम: अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) लागू हो सकता है।

अनुच्छेद 366

परिभाषाएं

इस संविधान में विभिन्न शब्दों की परिभाषाएं। 30 खंड

महत्वपूर्ण परिभाषाएं:

  • 366(12): राजस्व - राज्य का राजस्व
  • 366(15): अनुसूचित जाति - अनुच्छेद 341 के अधीन निर्दिष्ट
  • 366(22): राजप्रमुख - भाग B राज्यों का प्रमुख (अब अप्रचलित)
  • 366(25): अनुसूचित जनजाति - अनुच्छेद 342 के अधीन निर्दिष्ट
  • 366(26C): सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग - अनुच्छेद 342A
अनुच्छेद 367

निर्वचन

367(1): इस संविधान के निर्वचन के लिए साधारण खंड अधिनियम 1897 लागू होगा।

367(2): संविधान में किसी अधिनियम का उल्लेख उस समय प्रवृत्त अधिनियम के प्रति निर्देश समझा जाएगा।

367(3): राष्ट्रपति किसी कठिनाई को दूर करने के लिए आदेश द्वारा अनुकूलन कर सकता है (2 वर्ष तक)।

📌 महत्वपूर्ण बिंदु

Key Points

🛡️

राष्ट्रपति संरक्षण

पद के कार्यों के लिए न्यायालय से संरक्षण। दांडिक कार्यवाही नहीं। सिविल के लिए 2 माह नोटिस। महाभियोग ही उपाय।

📰

प्रेस स्वतंत्रता

361A - संसदीय कार्यवाहियों के सत्यनिष्ठ प्रकाशन पर न्यायालय में मुकदमा नहीं। 44वां संशोधन 1978।

👑

Privy Purse समाप्त

362 निरसित, 363A जोड़ा गया। 26वां संशोधन 1971। राजाओं के सभी विशेषाधिकार समाप्त।

📖

निर्वचन नियम

367 - साधारण खंड अधिनियम 1897 लागू। संविधान की व्याख्या के नियम। राष्ट्रपति को अनुकूलन की शक्ति।

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Source: Government of India Acts, Official Gazettes and Public Legal Documents.
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