368(1): इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, संसद अपनी संविधायी शक्ति का प्रयोग करते हुए इस संविधान के किसी उपबंध का परिवर्धन, परिवर्तन या निरसन के रूप में संशोधन कर सकेगी।
368(2): संशोधन विधेयक के रूप में संसद के किसी भी सदन में पुरःस्थापित किया जा सकेगा।
प्रक्रिया:
- विधेयक दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित
- कुछ मामलों में 50% राज्यों का अनुसमर्थन आवश्यक
- राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत - अनुमति देना बाध्य (24वां संशोधन 1971)
- राष्ट्रपति की अनुमति के बाद संविधान संशोधित माना जाएगा
368(3): अनुच्छेद 13 की कोई बात इस अनुच्छेद के अधीन किए गए संशोधन पर लागू नहीं होगी।
368(4) & (5): 42वां संशोधन 1976 - संसद की संशोधन शक्ति पर कोई सीमा नहीं। मिनर्वा मिल्स केस 1980 में असंवैधानिक घोषित। हटाया गया।