Limitation Act, 1963 की मुख्य विशेषताएं और जानकारी
- Limitation Act, 1963 भारत का एक महत्वपूर्ण सिविल कानून है जो विभिन्न प्रकार के मुकदमों (Suits), अपील (Appeals) और आवेदन (Applications) के लिए समय-सीमा (Limitation Period) निर्धारित करता है।
- यह अधिनियम 1963 में लागू किया गया था और यह सुनिश्चित करता है कि कानूनी कार्रवाई निर्धारित समय के भीतर ही की जाए।
- यह अधिनियम समय-सीमा, देरी की माफी (Condonation of Delay), और समय-सीमा समाप्त होने के प्रभाव (Time Bar) से संबंधित प्रावधानों को निर्धारित करता है।
1. संरचना और धाराएं
- Sections: 32
- Schedule: 137 Articles (Limitation Periods)
- Scope: मुकदमों, अपीलों और आवेदनों के लिए समय-सीमा निर्धारित करना
2. मुख्य प्रावधान
- Limitation Period: हर प्रकार के केस के लिए निश्चित समय सीमा
- Time-Barred Suit: समय सीमा के बाद दायर केस स्वीकार नहीं होता
- Condonation of Delay (Section 5): उचित कारण होने पर देरी माफ की जा सकती है
- Continuous Running of Time: समय एक बार शुरू होने के बाद लगातार चलता है
3. महत्वपूर्ण सिद्धांत
- Vigilantibus Non Dormientibus Jura Subveniunt: कानून उन्हीं की मदद करता है जो सतर्क हैं
- Equity does not override limitation: न्याय के नाम पर समय सीमा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
- Delay defeats equity: देर करने से अधिकार कमजोर हो जाते हैं
4. महत्वपूर्ण प्रावधान
- Section 3: Time-barred suits का खारिज होना
- Section 5: Delay condonation
- Section 18: Acknowledgment of liability
- Section 22: Continuing breach
- Schedule: विभिन्न मामलों के लिए limitation periods
5. उद्देश्य
- कानूनी मामलों में निश्चित समय-सीमा सुनिश्चित करना
- पुराने और अनावश्यक विवादों को समाप्त करना
- न्यायिक प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना
6. आधिकारिक जानकारी
- Gazette of India
- India Code Portal
Limitation Act – Chapter Wise Index
| भाग (Part) |
नाम (Name) |
धारा (Section) |
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|---|---|---|---|
| I | प्रारम्भिक Preliminary |
1-2 | |
| II | वादों, अपीलों और आवेदनों के परिसीमा Limitation Of Suits, Appeals And Applications |
3-11 | |
| III | परिसीमा काल की संगणना Computation Of Period Of Limitation |
12-24 | |
| IV | कब्जे द्वारा स्वामित्व का अर्जन Acquisition Of Ownership By Possession |
25-27 | |
| V | प्रकीर्ण Miscellaneous |
29-31 | |
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कुल भाग – 5
अनुसूची – 1
वर्ष – 1963
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Source: Government of India Official Publications and Public Domain Legal Documents.
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Limitation Act, 1963 FAQs
नीचे Limitation Act, 1963 से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं:
1. Limitation Act, 1963 क्या है?
Limitation Act, 1963 भारत का एक महत्वपूर्ण सिविल कानून है जो मुकदमों (Suits), अपील (Appeals) और आवेदनों (Applications) के लिए समय-सीमा (Limitation Period) निर्धारित करता है।
2. Limitation Act कब लागू हुआ?
Limitation Act, 1963 वर्ष 1963 में लागू किया गया था और यह आज भी भारत में लागू है।
3. Limitation Act में कुल कितनी धाराएं हैं?
इस अधिनियम में कुल 32 धाराएं (Sections) और एक विस्तृत Schedule है जिसमें 137 Articles के माध्यम से विभिन्न मामलों के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है।
4. Limitation Act किन मामलों पर लागू होता है?
यह अधिनियम सिविल मामलों में मुकदमे, अपील और आवेदन दाखिल करने की समय-सीमा निर्धारित करता है और समय सीमा समाप्त होने पर दावा (Claim) को अस्वीकार किया जा सकता है।
5. Limitation Period क्या होता है?
Limitation Period वह निर्धारित समय-सीमा है जिसके भीतर किसी व्यक्ति को न्यायालय में अपना मामला दायर करना होता है।
6. Time-Barred Suit क्या होता है?
जब कोई मुकदमा निर्धारित समय-सीमा के बाद दायर किया जाता है, तो उसे Time-Barred Suit कहा जाता है और न्यायालय उसे स्वीकार नहीं करता।
7. Section 5 (Condonation of Delay) क्या है?
Section 5 के तहत यदि देरी उचित कारण (Sufficient Cause) के कारण हुई है, तो न्यायालय देरी को माफ कर सकता है।
8. Limitation Act का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य कानूनी मामलों के लिए निश्चित समय-सीमा तय करना, पुराने विवादों को समाप्त करना और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाना है।
9. Acknowledgment (Section 18) क्या होता है?
यदि देनदार (Debtor) अपनी देनदारी को लिखित रूप में स्वीकार करता है, तो limitation period पुनः शुरू हो सकता है।
10. Limitation Act, 1963 का अध्ययन क्यों जरूरी है?
यह अधिनियम छात्रों, वकीलों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि समय-सीमा का पालन न करने पर कानूनी अधिकार समाप्त हो सकते हैं।