दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC)
THE CODE OF CRIMINAL PROCEDURE, 1973

Criminal Procedure Code 1973 (CrPC) की मुख्य विशेषताएं

Note: CrPC 1973 अब लागू नहीं है। इसे Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) 2023 द्वारा प्रतिस्थापित (replace) किया जा चुका है।

  • यह कानून आपराधिक मामलों में जांच (Investigation), गिरफ्तारी (Arrest), जमानत (Bail), ट्रायल (Trial) और न्यायिक प्रक्रिया को नियंत्रित करता था।
  • BNSS 2023 के लागू होने के बाद अब आपराधिक प्रक्रिया में आधुनिक और डिजिटल सुधार किए गए हैं।
  • नए कानून के लिए देखें: Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita 2023 (BNSS)

1. संरचना और धाराएं

  • धाराओं की संख्या: 484 धाराएं
  • संरचना: Chapters और schedules में विभाजित

2. प्रमुख प्रावधान

  • FIR (First Information Report): अपराध की सूचना दर्ज करने की प्रक्रिया
  • गिरफ्तारी (Arrest): आरोपी को हिरासत में लेने के नियम
  • जमानत (Bail): जमानत देने और न देने के प्रावधान
  • ट्रायल (Trial): अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया

3. BNSS 2023 के संदर्भ में बदलाव

  • ऑनलाइन FIR: CrPC में सीमित प्रावधान थे, जबकि BNSS में e-FIR की सुविधा दी गई
  • डिजिटल साक्ष्य: BNSS में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को अधिक स्पष्ट रूप से मान्यता
  • वीडियो ट्रायल: BNSS में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा
  • फॉरेंसिक जांच: BNSS में गंभीर अपराधों में अनिवार्य

4. जांच और ट्रायल प्रणाली

  • जांच और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया निर्धारित थी
  • ट्रायल प्रक्रिया न्यायालय द्वारा संचालित होती थी
  • BNSS में इसे अधिक समयबद्ध और efficient बनाया गया है

5. उद्देश्य

  • न्यायिक प्रक्रिया को व्यवस्थित करना
  • अपराधों की जांच और ट्रायल सुनिश्चित करना
  • न्याय प्रणाली को सुचारू रूप से चलाना

6. वर्तमान स्थिति (Important Update)

  • 1 जुलाई 2024 से भारत में आपराधिक प्रक्रिया BNSS के अनुसार लागू होती है।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में अब CrPC और BNSS दोनों का comparative अध्ययन महत्वपूर्ण है।

7. आधिकारिक जानकारी

  • Gazette of India
  • PRS India

दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अध्ययन का महत्व

दण्ड प्रक्रिया संहिता भारत का एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक कानून था, जिसने आपराधिक मामलों में जांच, गिरफ्तारी, जमानत और ट्रायल की प्रक्रिया को निर्धारित किया।

इसका अध्ययन आवश्यक है क्योंकि यह भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली की नींव है।


दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) – अध्यायवार अनुक्रमणिका

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) 2023 ने CrPC 1973 को replace किया है, इसलिए CrPC vs BNSS comparison समझना आज के समय में बहुत जरूरी है।

The Code Of Criminal Procedure, 1973 (CrPC) – Chapter Wise Index
S.no. CHAPTERS SECTIONS  
I Preliminary
प्रारम्भिक
1 - 5
II Constitution Of Criminal Courts And Offices
दण्ड न्यायालयों और कार्यालयों का गठन
6 - 25A
III Powers Of Courts
न्यायालयों की शक्ति
26 - 35
IV Powers Of Superior Officers Of Police And AID To The Magistrates and The Police
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की शक्तियां एवं मैजिस्ट्रैट और पुलिस को सहायता
36 - 40
V Arrest Of Persons
व्यक्तियों की गिरफ्तारी
41 - 60A
VI Processes To Compel Appearance
हाजिर होने को विवश करने के लिए आदेशिकाएं
61 - 90
VII Processes To Compel Production Of Things
चीजें पेश करने को विवश करने के लिए आदेशिकाएं
91 - 105
VII A Reciprocal Arrangements For Assistance In Certain Matters And Procedure For Attachment And Forfeiture Of Property
कुछ मामलों में सहायता के लिए व्यतिकारी व्यवस्था तथा संपत्ति की कुर्की और समपहरण के लिए प्रक्रिया
105A - 105L
VIII Security For Keeping The Peace And For Good Behavior
परिशान्ति कायम रखने के लिए और सदाचार के लिए प्रतिभूति
106 - 124
IX Order For Maintenance Of Wives, Children And Parents
पत्नी, संतान और माता-पिता के भरणपोषण के लिए आदेश
125 - 128
X Maintenance Of Public Order And Tranquillity
लोक व्यवस्था और प्रशांति बनाए रखना
129 - 148
XI Preventive Action Of The Police
पुलिस का निवारक कार्य
149 - 153
XII Information To The Police And Their Powers To Investigate
पुलिस को इत्तिला और उनकी अन्वेषण करने की शक्तियां
154 - 176
XIII Jurisdiction Of The Criminal Courts In Inquiries And Trials
जांचों और विचारणों में दण्ड न्यायालयों की अधिकारिता
177 - 189
XIV Conditions Requisite For Initiation Of Proceedings
कार्यवाहियों शुरू करने के लिए अपेक्षित शर्तें
190 - 199
XV Complaints To Magistrates
मजिस्ट्रेटों से परिवाद
200 - 203
XVI Commencement Of Proceedings Before Magistrates
मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही का प्रारंभ किया जाना
204 - 210
XVII The Charge
आरोप
211 - 224
XVIII Trial Before A Court Of Session
सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण
225 - 237
XIX Trial Of Warrant Cases By Magistrates
मजिस्ट्रेटों द्वारा वारण्ट-मामलों का विचारण
238 - 250
XX Trial Of Summons Cases By Magistrates
मजिस्ट्रेट द्वारा समन-मामलों का विचारण
251 - 259
XXI Summary Trials
संक्षिप्त विचारण
260 - 265
XXI A Plea Bargaining
सौदा अभिवाक
265A - 265L
XXII Attendance Of Persons Confined In Prisons
कारगारों में परिरुद्ध या व्यक्तियों की हाजिर
266 - 271
XXIII Evidence In Inquiries And Trials
जांचों और विचारणों में साक्ष्य
272 - 299
XXIV General Provisions As To Inquiries And Trials
जांचों और विचारणों के बारे में साधारण उपबंध
300 - 327
XXV Provisions As To Accused Persons Of Unsound Mind
विकृतचित्त अभियुक्त व्यक्तियों के बारे में उपबंध
328 - 339
XXVI Provisions As To Offences Affecting The Administration Of Justice
न्याय-प्रशासन पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के बारे में उपबंध
340 - 352
XXVII The Judgment
निर्णय
353 - 365
XXVIII Submission Of Death Sentences For Confirmation
मृत्यु दंडादेशों की पुष्टि के लिए प्रस्तुत किया जाना
366 - 371
XXIX Appeals
अपीलें
372 - 394
XXX Reference And Revision
निर्देश और पुनरीक्षण
395 - 405
XXXI Transfer Of Criminal Cases
आपराधिक मामलों का अंतरण
406 - 412
XXXII Execution, Suspension, Remission And Commutation Of Sentences
दंडादेशों का निष्पादन, निलंबन, परिहार और लघुकरण
413 - 435
XXXIII Provisions As To Bail And Bonds
जमानतों और बंधपत्र के बारे में उपबंध
436 - 450
XXXIV Disposal Of Property
संपत्ति का व्ययन
451 - 459
XXXV Irregular Proceedings
अनियमित कार्यवाहियां
460 - 466
XXXVI Limitation For Taking Cognizance Of Certain Offences
कुछ अपराधों का संज्ञान करने के लिए परिसीमा
467 - 473
XXXVII Miscellaneous
प्रकीर्ण
474 - 484
कुल अध्याय – 37 कुल धाराएं – 484 कुल अनुसूचियाँ – 2 वर्ष – 1973

Source: Government of India Official Publications and Public Domain Legal Documents.
This content is provided strictly for educational and informational purposes.

Frequently Asked Questions (FAQs) about CrPC 1973

नीचे CrPC 1973 से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं:

1. CrPC 1973 क्या है?

Code of Criminal Procedure (CrPC) 1973 भारत का पारंपरिक आपराधिक प्रक्रिया कानून था, जो आपराधिक मामलों में जांच, गिरफ्तारी, जमानत और ट्रायल की प्रक्रिया को नियंत्रित करता था।

2. CrPC 1973 कब लागू हुआ था?

CrPC 1973 को 1973 में लागू किया गया था और यह 1 जुलाई 2024 तक भारत में प्रभावी रहा।

3. CrPC में कुल कितनी धाराएं थीं?

CrPC 1973 में कुल 484 धाराएं (Sections) और 2 अनुसूचियाँ (Schedules) थीं, जो आपराधिक प्रक्रिया को नियंत्रित करती थीं।

4. क्या CrPC अब भी लागू है?

नहीं, CrPC 1973 अब लागू नहीं है। 1 जुलाई 2024 से इसे Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) 2023 द्वारा replace कर दिया गया है।

5. CrPC 1973 के मुख्य प्रावधान क्या थे?

CrPC में FIR दर्ज करना, गिरफ्तारी (Arrest), जमानत (Bail), जांच (Investigation), चार्जशीट और ट्रायल (Trial) की पूरी प्रक्रिया निर्धारित की गई थी।

6. CrPC और BNSS में मुख्य अंतर क्या है?

CrPC एक पारंपरिक कानून था, जबकि BNSS 2023 में डिजिटल साक्ष्य, ऑनलाइन FIR, वीडियो ट्रायल और समयबद्ध जांच जैसी आधुनिक प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है।

7. CrPC का उद्देश्य क्या था?

CrPC का मुख्य उद्देश्य आपराधिक मामलों की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना, न्यायिक प्रणाली को सुचारू रूप से चलाना और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना था।

8. क्या CrPC पूरे भारत में लागू था?

हाँ, CrPC 1973 पूरे भारत में लागू था और सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता था।

9. क्या CrPC में ट्रायल प्रक्रिया निर्धारित थी?

हाँ, CrPC में ट्रायल की विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित थी, जिसमें सत्र न्यायालय, मजिस्ट्रेट न्यायालय और विभिन्न प्रकार के मामलों के लिए अलग-अलग प्रावधान शामिल थे।

10. CrPC 1973 का अध्ययन क्यों जरूरी है?

CrPC का अध्ययन आज भी जरूरी है क्योंकि यह भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली की नींव है और BNSS 2023 को समझने के लिए इसका comparative अध्ययन महत्वपूर्ण है।